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 सदा रहेगा - सच गुजरा हुआ कल,
कसक उठता है - याद करते आज भी
समय - स्थान - सब, सब लोग दूर कहाँ चले गये
वह वर्तमान - कल बन' अनजान बन गया .
छूटे सभी जहाँ-तहां - यहाँ रहे कुछ वहां गये
कई जाकर न लौटे कभी
यही सब नहीं हो रहा निरंतर
साड़ी सृष्टी में
कहाँ - कैसा ? प्रेम मिटता - द्वेष करता -
अभावों से घिरी नहीं है क्या - ये सारी दुनिया ?
उसमें ही रमता रहा - साडी जिन्दगी मन,
समय के फेर का ही नाम क्या दुनिया,
समझना कठिन - और कठिनतर होता गया
समय का भेद कब कैसे मिटे ?
समझना आगया --
छण का गुजरना - पहर दिन - वर्ष -
युग का समझना -
आसान हो जाये

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100 ka note

बापू , बहुत पीड़ा होती है  तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर  चंद हरे पत्तों पर  देख कर  जिसको  पाने की चाह में  एक मजदूर  करता है दिहाडी  और जब शाम को  कुछ मिलती है  हरियाली  तो रोटी के  चंद टुकड़ों में ही  भस्म हो  जाती है  न जाने कितने  छोटू और कल्लू  तुमको पाने की  लालसा में  बीनते हैं कचरा  या फिर  धोते हैं झूठन  पर नहीं जुटा पाते  माँ की दवा के पैसे  और उनका  नशेड़ी बाप  छीन ले जाता है  तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर  और चढा लेता है  ठर्रा एक पाव . बिना तुम्हारी तस्वीरों को पाए  जिंदगी कितनी कठिन है गुजारनी  इसी लिए न जाने कितनी बच्चियाँ झुलसा देती हैं अपनी जवानी .  देखती होगी  जब तुम्हारी  आत्मा  अपनी ही मुस्कुराती तस्वीर  जिसके न होने से पास  किसान कर रहे हैं  आत्महत्या  छोटू पाल रहा है  अपनी ही लाश  न जाने कितनी बच्चियां  करती हैं...

naya sal

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