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घर लौट कर आया हू मै 






 ज़िन्दगी के जूऐ में

सब हौंसले हार के
घर परत आना
गली के मोड़ पे
बापू की खांसी पहचान लेना 
घर के दरवाज़े से 
माँ की आंहे सुन लेना 
किसी कोने में उड़ते 
बहन के आंसू देख लेना 
दीवार में फसें छोटे भाई के 
हाथ पकड़ लेना
कुछ इस तरह ही होता है 
जब बरसों बाद 
घर से अपनी रोशनी ढूँढने गया 
घर का चिराग 
किसी सुबह को 
दुनिया के तमाम अंधेरे 
लेकर लौट आए 
और अपनी आंखों से 
खुश्क सा गिला करे ... ।
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