Skip to main content


 



सोचता रहा लेकिन बोल नही पाया ...... डरता रहा लेकिन कह नही पाया 


 २०१० की बात है ..... कोटा राजस्थान में मै नवज्योति न्यूज़ पेपर में काम करता था . कोर्ट और क्राइम बीत थी मेरी . एक सटका हुआ आदमी कोर्ट में आया . कुरता पहने हुए था कुरते की जेब फटी हुई थी और हडबड़ा कर बोल रहा था . देखने में पागल जैसा लग रहा था ...एक कोर्ट में ही काम करने वाले आदमी  से बात कर रहा था तभी मै उसके पास पहुच गया . उस आदमी ने मेरी तरफ इशारा किया की ये  क्राइम रिपोर्टर है तुम्हारी प्रॉब्लम सोल्वे कर देंगे . इतना सुनकर वो मुजह्से बात करने लगा . मै भी ज़ल्दी में था और कोर्ट में अपने पत्रकार बंधूओ को दूद रहा था . मेरी हिम्मत नहीं पड़ी की उसकी पागल पने की बात सुन सकू . उसने मेरे से बोला की पोल्लिस में मैंने कोम्प्लैन की उसने नहीं सुनी .महल्ले वालो से कहा तो वो भी नहीं सुन रहे है.. मेरे घर के पास रहने वाला आदमी आये दिन मेरे घर वालो को परेसान करता है , मै क्या करू ... बहकी बहकी बात मुजह्से कर रहा था और मै ज़ल्दी में था . मैं हलके से मजाक के मूड में  उससे पेश आया और बोला पोल्लिस और मौहले वाले दोनों के कण की नीचे लगाओ सब सुनेगे ..... इतना कहकर मै चलने लगा . लेकिन वो मेरा पीछा करते हुए अपनी धुन में बडबडाता रहा. किसी तरह उससे मैंने पीछा छुड़ाया... आई गयी बात चली गयी . दो दिन बाद पोल्लिस चौकी में घुसकर एक कांस्ताबेल की हत्या कर दी गयी .. रात ९.३० की घटना थी हॉस्पिटल गया और मैंने खबर छापी ... दो दिन तक उसका कोई पता न चलने पर पोल्लिस ने उसका फोटो जारी किया .. नवज्योति के मेल पर उसकी फोटो देखकर मै दंग रह गया ..... वो व्ही आदमी था जो  मुजहे कोर्ट में मिला था .... काम ख़त्म करने के बाद मै उसके बारे में ही सोचते सोचते सो गया .... कोटा की बड़ी घटना थी मै फोल्लौप डालता गया ... पोल्लिस ने उसपर ४००० का इनाम भी घोषित किया लेकिन वो पकड़ में नही आया ....... ७ दिन की फरारी काटने के बाद वो कोटा आया और अपना एक सन्देश छोड़ गया .जिसमे उसने कहा की अभी दो पत्रकार और एक पोल्लिस वाले की हत्या और करनी है ..... तब जा कर मेरा माथा ठनका और बहुत ज्यादा अपने आप पर अफ़सोस भी हुआ .... रात में २ बजे ऑफिस छोडता था मै मुजहे डर भी लगने लगा था अपने रूम तक पहुचने में . मेरे ऑफिस से रूम की दुरी १ किलोमीटर थी लेकिन उन दिनों वो दस से भी ज्यदा लगने लगी थी ..... १५ दिन बाद जब वो पकड़ में आया तो मेरे जन में जन आई ....... अपने आप को गिल्टी समज्हते हुए मै किसी से इस बात को उन दिनों बता भी नही पाया बहुत दिनों तक दिल में छुपी रही ये बात 
1 

View comments

  • Recent
  • Date
  • Label
  • Author
1
Loading

Comments

Popular posts from this blog

100 ka note

बापू , बहुत पीड़ा होती है  तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर  चंद हरे पत्तों पर  देख कर  जिसको  पाने की चाह में  एक मजदूर  करता है दिहाडी  और जब शाम को  कुछ मिलती है  हरियाली  तो रोटी के  चंद टुकड़ों में ही  भस्म हो  जाती है  न जाने कितने  छोटू और कल्लू  तुमको पाने की  लालसा में  बीनते हैं कचरा  या फिर  धोते हैं झूठन  पर नहीं जुटा पाते  माँ की दवा के पैसे  और उनका  नशेड़ी बाप  छीन ले जाता है  तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर  और चढा लेता है  ठर्रा एक पाव . बिना तुम्हारी तस्वीरों को पाए  जिंदगी कितनी कठिन है गुजारनी  इसी लिए न जाने कितनी बच्चियाँ झुलसा देती हैं अपनी जवानी .  देखती होगी  जब तुम्हारी  आत्मा  अपनी ही मुस्कुराती तस्वीर  जिसके न होने से पास  किसान कर रहे हैं  आत्महत्या  छोटू पाल रहा है  अपनी ही लाश  न जाने कितनी बच्चियां  करती हैं...

naya sal

हर साल बस यु ही होता है , पुराना साल जाता है, और नया  साल आता है, हम बस वही रह जाते है जाते  हूये को ताकते रहते है और आते हुये को भी ताकते ही रहते है, कुछ भी तो नही कर पाते है, अजी हर साल कसमे खाते है पर सिगारेट की लत है की   छोड नही पाते है........  
जब  भी  कभी दोस्त   मुझे , 2 पेग  व्हिस्की  देते  थे  मैं  झूल   जाता  था  माँ , मेरी  नज़र  ढूंढें  ठेके , सोचु  यही  तू  मुझको  नज़र  न  आ जाये  माँ  दारू  मैं  इतना  पिता  नहीं , पर  मैं  सहम  जाता  हूँ  माँ , चेहरे  पे  आने  देता  नहीं , लेकिन  मैं  लुडक  जाता  हूँ  माँ , तुझे  सब  है  पता  है  ना  माँ  ….